मरवाही वनमंडल में ग्रीन क्रेडिट योजना फेल: 500 हेक्टेयर के पौधे सूखे, करोड़ों की राशि पर सवाल
योजना के उद्देश्य—हरियाली बढ़ाने—पर ही सवाल खड़े

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल में सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन क्रेडिट योजना गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के आरोपों में घिर गई है। पिछले वर्ष बारिश के दौरान लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में किए गए पौधारोपण का अधिकांश हिस्सा अब सूख चुका है, जिससे योजना के उद्देश्य—हरियाली बढ़ाने—पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर इस योजना में संगठित तरीके से भ्रष्टाचार किया और सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ।
बताया जा रहा है कि सबसे पहले पौधारोपण के लिए अनुपयुक्त, पथरीली और असिंचित भूमि का चयन किया गया। शासन को गुमराह कर ऐसे क्षेत्रों में स्वीकृति ली गई, जहां पौधों का जीवित रहना पहले से ही कठिन था। कागजों में सिंचित और उपयुक्त भूमि दिखाकर योजना को मंजूरी दिलाई गई, जबकि मौके पर स्थिति बिल्कुल अलग पाई गई।इसके अलावा, बोरवेल खुदाई और अन्य सामग्रियों की खरीदी में भी भारी गड़बड़ी के आरोप हैं। कई स्थानों पर बोर तो खोदे गए, लेकिन बिजली की व्यवस्था नहीं की गई, जिससे पौधों को समय पर पानी नहीं मिल सका। अब जब गर्मी अपने चरम पर है, तब जाकर बिजली की व्यवस्था करने की बात कही जा रही है—लेकिन तब तक लगभग 70–80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं।

इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो रही है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत से यह नुकसान हुआ है, उनसे राशि की वसूली कर नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। वनमंडल में कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई क्षेत्रीय कर्मचारी अपने मुख्यालय में नहीं रहते, जिससे जंगल की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। निगरानी के अभाव में अव्यवस्था बढ़ रही है और योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं।
वर्तमान वनमंडलाधिकारी (DFO) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जंगल सुरक्षा और योजना के क्रियान्वयन में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिसके चलते न केवल सरकारी धन की हानि हुई बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गहरा झटका लगा है। अब देखना होगा कि शासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है—क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?










